मऊ। जिले मे गोंड विरादरी के न होने की खबर हैं। यह फर्स्ट इनफार्मेशन्स नहीं बल्कि जिला जाति सत्यता समिति जनपद मऊ की कार्यवृत्ति दिनांक 10/1/2018 मे कहते हुए खुलासा किया गया हैं। जिला जाति सत्यापन समिति मऊ द्वारा पारित अपने आदेश पत्रांक e 1560 दिनांक 5/2/2018 के बिन्दु 17 में उल्लेख किया है कि जनपद मऊ में जनजाति के लोग निवास नहीं करते हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी कार्यालय ने कार्यवृत्ति दिनांक 10/1/2018 के माध्यम से ग्राम पंचायत दौलसेपुर के मिथिलेश पाण्डेय के द्वारा गोड़ विरादरी के द्वारा गोंड बनकर बनवाये गए जाति प्रमाण पत्र का

निस्तारण करतें हुए गोंड जाति के नाम जारी आरोपित प्रमाण पत्रों को निरस्त करतें हुए पैरा 17 मे इस बात का उल्लेख किया गया हैं

की, मऊ जिले मे अनुसूचित जान जाति मे आने वाली विरादरी धुरिया, नायक, ओझा, पठारी, राजगोंड मे से किसी भी जन जाति को मऊ जिले मे नहीं होने की बात का खुलासा किया गया हैं।

यही इसी पैरे मे यह भी लिखा गया हैं कि पूर्व मे नायक को जनजाति का प्रमाण पत्र जारी किये जाने के कारण तहसीलदार घोसी,

एवं तहसीलदार मधुबन, जानचोपरान्त निलंबित हुए हैं, तथा उनके बिरुद्ध अनुशासननात्मक कार्यवाही भी किये जाने का हवाला दिया गया हैं। मजे की बात यह हैं कि जिला सत्यता समिति के द्वारा किये गए इस खुलासे के बावजूद जिले के ग्राम पंचायतो मे सचिव, राजस्व बिभाग मे लेखपाल, आदि पदों पर अधिकांश लोग गोंड जाति के जाति प्रमाण पत्र पर सरकारी नौकरी लार रहे हैं।

उपजाति कहार के अधिकांश गए कहा?
जिले मे गोड़ विरादरी के अधिकांश के गायब होने का भी खुलासा होता हैं। न्यायहित और समाजहित मे गोड़ जाति के लोग जिनकी उपजातियां भड़भुजा, कहार हैं कि भी खोज होनी चाहिए, जाति सत्यता समिति के द्वारा जिन प्रमाण पत्रों को निरस्त किया गया वे कोस विरादरी के लोग थे उन्हें नियमानुसार उन्हें आरक्षण किस वर्ग का मौलना चाहिए, सामान्यतया निरस्त किये गए अधिकांश गोंड जाति के प्रमाण पत्र गोड़ विरादरी के बताये जा रहे हैं।
