मऊ | जिले में एक विरादरी के अधिकांश लोगो के द्वारा राजस्व कर्मचरियों कोअपनी अपराधिक साजिस में लेकर फर्जी जाति प्रमाण पात्र बनवाकर जहा सरकारी सेवाए हडपी गई है तो वही पर इन्ही जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर फर्जी सस्ता गठित कर जाति प्रमाण पत्र को जारी किये जाने की खुलेआम की जा रही मांग में सरकारी कार्यालयों पर दिए जा रहे धरना प्रदर्शन को लेकर जहा प्रशासन कार्यवाही से जानबूझकर पीछे भाग रहा है तो वही पर अखबारों के द्वारा खुलेआम आरोपित विरादरी को संरक्ष्ण दे कर अपराधिक कारनामो को अंजाम दिया जा रहा है |
जनगणना के अनुसार जाति प्रमाण पत्र की मांग करने वाली इस विरादरी की संख्या वर्ष १९६१, १९७१, १९८१ की जनगणना में इनकी संख्या जीरो थी आचानक वर्ष १९९१ में इनकी संख्या साढ़ेनौ हजार से अधिक हो गई | इस विरादरी के अधिकांश लोगो के द्वारा अनुसूचित जन जाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर अविधिपूर्ण तरीके से नौकरी की जा रही है , जिनके प्रमाणक होते हुए लीडिंग अखबारों में सुमार अखबारों के द्वारा उनकी साजिस में आकर उनके द्वारा जाति प्रमाण पत्रों को बनवाने की जा रही मांग में सरकारी कार्यालयों में दिए जा रहे धरना और प्रदर्शन की खबरो का प्रकाशन किया जा रहा है |
ग्राम पंचायत अधिकारी ,ग्राम विकास अधिकारी ,लेखपाल, पुलिस विभाग, शिक्षा विभाग, यहाँ तक कि न्याय विभाग में फर्जी अनुसूचित जन जाति के प्रमाण पत्रों पर नौकरी हथियाए अधिकांश लोगो को शिकायत की जद में आने के बाद जाति बदल कर जाति के नाम से बनाई गई सस्ठा के फर्जी लोगो को समूह में इकट्ठा कर धरना प्रदर्शन के माध्यम से जाति प्रमाण पत्रों को बनवाने की मांग की जाति है तो वही पर फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नानौकारी करने वालो की शिकायत करने वालो ले खिलाफ तथ्यहीन आरोप दर्र्ज कराने की तहरीरे तक डी जाती है |
जाति प्रमाण पत्रों की मांग करने वाली जाति की उत्त्पत्ति की उपेक्षा
सरकारी दफ्तरों के सामने ” एक तो चोरी दुसरे सीना जोरी ” के चिन्हों पर चल कर समूह में आये लोगो के द्वारा जाति प्रमाण पत्रों की मांग करने वाली विरादारियो की जिले में उत्पत्ति पर अखबर वाले मौन साध के सिर्फ उनकी मांग पर फोकस कर खबरे प्रकशन पर जोर दे रहे है | अखबरो की यह कार्यप्रणाली पूरी तरह से भ्रामक और अपराधिक है | मूल आदिवासी जनजाति कल्याण सस्ठा के राष्ट्रिय अध्यक्ष बी बी चौधरी ने अखबरो की रिपोर्टिंग पर चिंता जताते हुए कहा है कि यदि पत्रकारों को उनकी खबरों को छापना जरुरी है तो वे उनकी उत्पत्ति कब कहा और कैसे हुई है ? को भी प्रकाशित करें , अन्यथा मूल आदिवासी जनजाति कल्याण सस्ठा कानूनी कार्यवाही को लेकर आगे बढ़ेगी |
आरक्षण के लिए जाति बदलकर, जाति प्रमाण पत्र की मांग
जिले कैमूर और सोनभद्र मिर्जापुर इलाके में पाई जाने वाली अनुसूचित जन जाति में सूचि बद्ध जातियों को मिले आरक्षण का लाभ लेने के लिए जनपद के अधिकांश लोगो ने अपनी जाति को राजस्व कर्मचारियों से सांठ गाँठ कर बदल कर नौकरिया हडप लिया है तो इन्ही फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के सहारे फर्जी सस्ठा का गठन कर अबैध समूह द्वारा जाति प्रमाण पत्र की मांग की जा रही है |
वर्ष २०१८ में ४५ का जिलाधिकारी कर चुके है जाति प्रमाण पत्र को निरस्त
मिथिलेशपाण्डेय बनाम उतर प्रदेश राज्य के मामले में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा इस बात की जानकारी देते हुए कि यह विरादरी जिले में नहीं पाई जाती है . ४५ अनुसूचित जन जाति के फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त किया जा चुका है |
