मऊ। अनुसूचित जन जाति के आरक्षण के सहारे जाति बदलकर नौकरी करने वालों के हर रोज नए नाम सामने आ रहे हैं। पिछडी जाति की कटेगरी में मौजूद गोड़ (कहार) विरादरी के अधिकांश लोगो के द्वारा आदिवासी बनकर अनुसूचित जन जाति के आरक्षण में सेंध मार कर नौकरी हथियाई जा रही है १ फर्स्ट इनफार्मेशन्स के द्वारा जाति बदलकर सरकारी नौकरी हथियाने वालो के नामो का खुलासा करने में मूल आदिवासी जनजाति कल्याण सस्था के पास मौजूद सरकार के शोध पत्र और वर्तमान में यूपी के मऊ, गाजीपुर आजमगढ़ , बलिया , देवरिया, महराजगंज, गोरखपुर सहित १७ जनपदो में २००३ के बाद से गोंड और गोड़ विरादरी की मौजूदगी में आये अन्तर ने लोगो को हैरत में डाल दिया है
जिले में ९० हजार पार हुई,कभी न रहने वाली अनुसूचित जन जाति की संख्या
अनुसूचित जन जाति के फर्जी प्रमाण पत्र पर संभल में सरकारी नौकरी हथियाए ओंकार पुत्र आनंद को वर्ष २०२० में जनजाति विकास विभाग के द्वारा जन सूचना अधिकारी अधिनियम के तहत कुल २३१ पृष्ठ में सौपी गई रिपोर्ट ने चौका दिया है १ ओंकार को मिले सूचनाओ में अगर केवल जनपद मऊ के सभी बिकास खंडो के मौजुद बताये जा रहे अनुसूचित जन जाति के लोगो की संख्या में आकड़ो की बात की करे तो बिकास खंड बनराव में ८३१६ , घोसी में ५६१५ फतेहपुर ममंडाव में १५३२० रानीपुर में ८१४४ कोपागंज में ६४६६ रानीपुर में १३५३२ दोहरीघाट में १०३६७ परदहा में १२५०१ और मुहम्मदाबाद गोहाना में १०६६० सहित जिले में कुल ९०८२१ अनुसूचित जन जाति के लोगो की उपस्थित है १
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मऊ के अखिल भारत वर्षीय गोंड महासभा के राजेश पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र हड़पने का आरोप
उधर दिनक १०/१/२०१८ को जिला स्तरीय जातीय सत्यता समिति के अध्यक्ष और जिले के जिलाधिकारी मऊ के द्वारा एक कार्यवृत्ति के पैरा १७ में अनुसूचित जन जाति की उपस्थिति से सीधे इंनकार ने जिले में अनुसूचित जन जाति की उपस्थिति पर सवाल खड़ा कर दिया है तो वही पर उत्तर प्रदेश सर्कार के जनजाति विकास बिभाग से अनुसूचित जन जाति के फर्जी जाति प्रमाण पत्र नौकरी कर रहे जनपद माऊ के तहसील मधुबन के गाँव दुबारी निवासी ओंकार पुत्र आनंद के द्वारा जनसूचना अधिकार अधिनियम २००५ के ताहत ली गई सुचना में बिभाग से मिले २३१ पृष्ठ में ब्लाक वार दिए गये रिकॉर्ड ने प्रशाशनिक दावो पर संसय पैदा कर दिया है १
गाँवो में कभी संख्या में रहे गोड़ गये कहा ?
जनपद मऊ में जाति बदल कर अनुसूचित जन जाति के जाति प्रमाण पत्र नौकरी कर रहे अधिकांश गोड़ विरादरी के लोगो के नामो को फर्स्ट इनफार्मेशन्स के द्वारा खुलासा करने के बाद से अनुसिचित जन जाति के जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे लोगो में हलचल के साथ सवाल खड़ा कर दिया है १ पिछड़ी जाति के अधिकांश गोड़ सीधे अनुसूचित जन जाति के गोंड के जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी कैसे करने लगे ?
राजस्व कर्मचारियों को अपनी साजिस में लेकर तथ्यों को छुपाकर और कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से अनुसूचित जन जाति के जाति प्रमाण पत्र हथियाए अधिकांश गोंड जारी राज्ग्या के शब्द गोंड में अनुस्वार की गलती की दलील देकर राज्ग्या को गोड़ विरादरी के लिए जारी हुआ बता रहे है १ ऐसी स्थितियों में गोंड जाति के आरक्षण में गोड़ विरादरी के अधिकांश के द्वारा की जा रही नौकरी की जांच न्यायहित में जरुरी बनती देखी जा रही है १ समाज सेवी राजेस मिश्र ने गोंड जाति के लोगो की आचानक संख्या में वृद्धि को चौकाने वाला करार देते हुए कहा की गोंड जाति के लोगो की मऊ जिले में उपस्थित और गोड़ जाति जो गाँवों में पूर्व में भड़भूजे का काम करती थी, की अनुपस्थिति की सरकार द्वारा न्यायहित में जांच अत्यंत जरुरी हो गई है १ क्योकि १९७१, १९८१ और १९९१ में जाति शोध में गोंड का जिले में उपस्थिति नहीं थी १
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मऊ के मुहम्दामदाबाद गोहना ब्लाक के सचिव संजय पर नौकरी के लिए आदिवासी बनने का आरोप
