बलिया ! माननीय उच्च न्यायलय इलाहाबाद में योजित याचिका संख्या २९२०६/२०१६ और ३६८६७/१६९२ में इस बात का सपथ पत्र देने के बावजूद कि जिले में अनुसूचित जन जाति के लोग जिले में नही है, जिन लोगो के नाम तहसील स्तर से अनुसूचित जन जाति के जाति प्रमाण पत्र जारी किये गये है उसको निरस्त किया जा चुका है, बर्तमान में जाति प्रमाण पत्र नही बनाये जा रहे है, दुबारा तहसीलदार बलिया के द्वारा गोंड विरादरी के लोगो के नाम, उनके द्वारा तथ्यों को छुपाकर और कूट रचित दस्तावेजो के सहारे जाति प्रमाण पत्र को निर्गत करने की खबर है ! तहसीलदार बलिया के द्वारा जारी किये जा रहे जाति प्रमाण पत्र को लेकर आदिवाशी सस्था ने जिलाधिकारी बलिया पर पदीय अधिकारों की आड़ में मनमानी करने और कानून की अवमानना का आरोप लगाया गया है !
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले के केवल तहसील बलिया के तहसीलदार के द्वारा इलाकाई लोगो के नाम गोंड विरादरी के लोगो को जाति प्रमाण पत्र जरी किये जा रहे है ! जब की यहाँ के सभी तहसीलदारों के द्वारा अपर जिलाधिकारी राजस्व और वित्त से, गोंड विरादरी के नाम जाति प्रमाण पत्र जरी करने के बाबद दिशा निर्देश को प्रस्तुत पत्र पर आज तक अपर जिलाधिकारी के लेवल से कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किया गया है ! दिशा निर्देश मिलने से पहले बलिया तहसीलदार के द्वारा गोंड विरादरी के जारी किये जा रहे जारी जाति प्रमाण पत्रों पर मूल आदिवासी जनजाति कल्याण सस्था के द्वारा आपत्ति जताई जा रही है, तथ्यों के साथ गोंड विरादरी के लोगो की बलिया जिले में भी नही है मौजुस्गी को प्रमाणित कर रही दलीलों का प्रशासन पर कोई असर नही देखा जा रहा है ! प्रशासन की इस कार्यशैली को देखते हुए आदिवासी सस्था शीर्ष दरबार में दस्तक देने की तयारी में है !
आदिवासी सस्था की दलील
सस्था का कहना है की जब एक बार जिलाधिकारी बलिया के द्वारा जिले में गोंड विरादरी की मौजुस्गी को इनकार किया जा चुका है तो आचानक जिले में गोंड विरादरी की उपस्थित सरकारी दस्तावेजो में खटकना स्वभाविक है ! सस्था का कहना है की जिलाधिकारी जहा कानून और राजाज्ञा की अवमानना कर रहे है तो वही पर पदीय अधिकारो की आड़ में मनमानी कर रहे है!
किन परिस्थितियों में वर्तमान डीएम बलिया गोंड विरादरी के लोगो के नाम जारी कर रहे है जाति प्रमाण पत्र . जांच की मांग
…जिलाधिकारी बलिया के द्वारा अदालत में दिए गये सपथ पत्र की वर्तमान जिलाधिकारी के द्वारा हवा क्यों निकाली जा रही है ? यह भी जाँच की विषय वस्तु है ! किन परिस्थितियों में एक जिलाधिकारी के द्वारा एक आदेस जारी किया जाता है और दुसरे जिलाधिकारी के द्वारा पहले वाले जिलाधिकारी के आदेसो की हवा निकालने में नए आदेस जारी किये जाते है ? ऐसे मामले की जाँच तब जरुरी बन जाती है जब कोई आदेश या टिप्पणी सपथ पत्र से हो और अदालत में प्रस्तुत किया गया हो …वर्तमान जिलाधिकारी ने किन कारणों से पहले वाले जिलाधिकारी के द्वारा सपथ पत्र के माध्यम से जारी आदेस / सपथ पत्र का उल्लंघन कर अनुसूचित जन जाति के लोगो को जाति प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है जाँच किया जाना आवश्यक है, आदिवासी सस्था जाँच की मांग करती है
