
जयपुर, । राजस्थान हाईकोर्ट ने परीक्षा में नकल से जुड़े मामले में न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे आधा दर्जन से अधिक युवाओं को संबंधित थानाधिकारी के सुपरविजन में रोजाना दो घंटे सफाई करने की शर्त पर जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश बलबीर सहित कुल आठ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने कहा कि परीक्षा में नकल रोकथाम से जुड़े कानून के तहत अभियुक्तों पर एक करोड रुपए तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान है। ऐसे में इस प्रकरण में आरोपी अपनी रिहाई से पूर्व दस लाख रुपए की बैंक गारंटी जमा कराए। वहीं जमानत मिलने के बाद हर दो दूसरी माह की पांच तारीख को आरोपी संबंधित थाने में अपनी उपस्थिति दर्ज कराए। इसके साथ ही अदालत ने चालीस लाख रुपए के व्यक्तिगत मुचलके और पांच-पांच लाख रुपए की दो जमानत पेश होने पर आरोपियों को जमानत पर रिहा करने को कहा है।
जमानत याचिका में अधिवक्ता दीपक चौहान व अन्य की ओर से कहा गया कि आरोपियों को गत जनवरी माह में गिरफ्तार किया गया था और उसके बाद से वे जेल में बंद हैं। प्रकरण में उनके खिलाफ आरोप पत्र पेश होने के बाद निचली अदालत की ओर से प्रसंज्ञान लिया जा चुका है। वहीं मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लगेगा। इसके अलावा सभी याचिकाकर्ता नवयुवक हैं और परिवार की आजीविका चलाते हैं। ऐसे में उन्हें जमानत दी जाए। जिसका विरोध करते हुए सरकारी वकील की ओर से कहा गया कि पेपर लीक और परीक्षा में नकल संगठित अपराध है और इनमें पांच से दस साल तक की सजा और एक करोड रुपए का जुर्माना लगाया जा सकता है। मामले में आरोपियों के खिलाफ शहर के वैशाली नगर थाने की ओर से कार्रवाई की गई थी। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज की जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को सशर्त जमानत पर रिहा करने को कहा है।
