मऊ। फातिमा प्रबंधन ने तब स्वेता को डाला आईसीयु में ज़ब इंजेक्शन के बाद उसकी तबियत ख़राब हुईं.. इस बात का खुलासा फर्स्ट इनफार्मेशन्स नहीं बल्कि मृतका स्वेता के पति के द्वारा क्षेत्राधिकारी मऊ के सामने किया गया ।
स्वेता के परिजनों के अनुसार मृतका स्वेता की तबियत बिलकुल सही थी, चिकित्स्कों की सलाह पर उसको ब्लड चढ़ाया जा रहा था, इसी बींच हॉस्पिटल की एक नर्स द्वारा दिए गए एक इंजेक्शमन ने मृतका को हॉस्पिटल के आई सी यूँ में पंहुचा दिया ।
स्वेता की मौत के बाद उसके परिजनों में उसके पति और मामा आदि के द्वारा हॉस्पिटल प्रबंधन पर गलत इलाज का आरोप लगाते हुए बवाल काटा गया, और फिर कार्यवाही में एफ आई आर और फिर पोस्टमॉर्टम कराने से इंकार करतें हुए कार्यवाही नहीँ चाहने का प्रशासन से मिन्नते की गईं उस पर सवालों का ढेर हैं।
सवाल कार्यवाही का
ज़ब कार्यवाही नहीँ चाही गईं तों बवाल क्यों काटा गया? मौत को संदिग्ध बनाया? पुलिस ने ऐसी संदिग्ध मौत पर जाँच को आगे क्यों नहीँ बढ़ी? बेदाग की जाँच होनी ही चाहिए थी, के साथ आदि सवालो का ढेर हैं
हॉस्पिटल में मौत , फिर बवाल, बचाव का बहाना तों नही!
मृतका के परिजनों ने हॉस्पिटल प्रबंधन पर गलत इलाज में गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगा कर पोस्टमॉर्टम क्यों नहीँ कराया यह भी मृतका की मौत को संदिग्ध बनाता दीख रहा हैं। मौत कैसे हुईं? और मौत के बाद स्वेता के परिजनों ने जिस तरह का हॉस्पिटल पर बवाल काटा, प्रशासन पर मिली भगत का आरोप लगाकर किन परिस्थितियों में कार्यवाही को नहीँ चाहने का पब्लिक में मिडिया को बयान दिया? यह सब स्वेता की मौत को संदिग्ध होने की ओर इशारा करतें हैं, प्रशासन को न्यायहित में इन तथ्यों के साथ जाँच कर कार्यवाही करनी चाहिए।
न गलत दिया इंजेक्शन न किया गलत उपचार : हॉस्पिटल प्रबंधन
फातिमा हॉस्पिटल में बीते 26 दिसम्बरर की देर शाम को होस्पिटल में भर्ती स्वेता की मौत के बाद उनके परिजनों के द्वारा लगाया जा रहा गलत इलाज का आरोप, पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। हॉस्पिटल प्रबंधन न कहा कि हॉस्पिटल के चिकित्सक योग्य और अनुभवी हैं, वे किसी भी मरीज का गलत उपचार क्यों करेंगे? हॉस्पिटल प्रबंधन पर लगाया जा रहा गलत इलाज का आरोप बे बुनियाद हैं।
