👉 वर्ष 2020 मे प्रमुख सचिव मनोज सिंह ने फर्जी जाति पर और इसके आधार पर नौकरी करने वालो की जाँच व कार्यवाही को जारी किया हैं आदेश
👉 वर्तमान मे जिलाधिकारी बलिया, कुशी नगर के इशारे पर तहसीलदार बलिया व कुशीनगर मे पिछड़ी जाति के लोगो को जारी किया जा रहा हैं अनिसूचित जन जाति का प्रमाण पत्र
लखनऊ/आजमगढ़ / बलिया / मऊ । उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने एवं इसके आधार पर विभिन्न शासकीय व सार्वजनिक उद्यमो, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको आदि मे आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले ब्यक्तियो के विरुद्ध समय बद्ध कार्यवाही को सूबे के समस्त मंडलायुक्त और समस्त जिलाधिकारियो को जारी आदेश का कही भी समय बद्ध पालन नहीं किये जाने कि खबर हैं।जिलाधिकारियो के समक्ष पड़ रहे आवेदनों का समय बद्ध निस्तारण नहीं होने से फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे, सेवा निवृत्ति के कगार पर पहुंच गए हैं।
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प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन मनोज सिंह के द्वारा पत्रांक समाज कल्याण अनुभाग 79017/26/3/2020 को सूबे समस्त मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को इस बात का आदेश जारी किया गया था कि, शासन को सूबे मे अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने एवं इसके आधार पर विभिन्न शासकीय व सार्वजनिक उद्यमो, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको आदि मे आरक्षण का लाभ प्राप्त करने वाले ब्यक्तियो के विरुद्ध शिकायते प्राप्त हो रही हैं। इन शिकायतों के समय बद्ध निस्तारण के लिए प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह के द्वारा सूबे के समस्त मंडलायुक्त और जिलाधिकारी को समय बद्ध कार्यवाही का आदेश दिया गया था।
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मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी बी चौधरी ने सूबे के समस्त मंडलायुक्तो और जिलाधिकारियो पर प्रमुख सचिव द्वारा जारी उक्त शसनादेस को जानबूझकर ताक पर रख कर आज भी जनपदों मे अनुसूचित जन जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाये जा रहे हैं। उन्होंने कहा वर्तमान समय मे जनपद बलिया के तहसीलदार द्वारा आये दिन पिछड़ी जाति मे सुचिबद्ध गोड़ विरादरी के अधिकांश लोगो को अनुसूचित जन जाति का प्रमाण पत्र बनाया जा रहा हैं। उन्होंने कहा कि इन फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी करने वालो के खिलाफ शिकायतों के निस्तारण मे भी जिला स्तर पर कार्यवाही मे जानबूझकर देरी की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि कही जिलाधिकारी के द्वारा जाति सत्यता समिति मे ही मामले प्रेषित नहीं किया जा रहा हैं तों कही जाँच मे तहसीलदार द्वारा जाँच आख्या देने मे जानबूझकर देरी की जा रही हैं। मजे की बात तों यह हैं कि राज्य स्तर पर भी जाति सत्यता समिति की ओर से ऐसे मामलो की जाँच के लिए गंभीरता नहीं दिखाई जा रही हैं।
जिला विद्यालय निरीक्षक आजमगढ़ की आज तक जनपद मऊ के तहसीलदार मधुबन ने नहीं दी जाँच आंख्या.. लेटर निचे हैं
जिलाधिकारिबसे लगायत राज्य स्तर तक कई शिकायते और उनकी जांचे संबंधित अषिकारियो के द्वारा पदीय अधिकारों की आड़ मे जानबूझकर रोकी गईं हैं तों स्पीकिंग आर्डर जारी नहीं करने के कारण कई आरोप आज तक यथावत बने हैं।
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