लखनऊ | गोड़ विरादरी के अधिकांश लोगो के द्वारा गोंड बनकर तथ्यों को छुपाकर और दूत रचित दस्तावेजो के सहारे राजस्व कर्मचारियों को अपनी साजिस में लेकर अनुसूचित जन जाति के बनवाये जा रहे फर्जी जाति जाति प्रमाण पत्र को लेकर मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था के राष्ट्रिय अध्यक्ष बिजय बहादुर चौधरी के द्वारा साक्ष्य सहित दिए फर्स्ट इनफार्मेशन्स को दिए गये स्टेटमेंट के आधार पर प्रकशित खबर पर समाजवादी पार्टी के गोंड महासभा के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार गोंड ने फर्स्ट इनफार्मेशन्स के सपांदक को रिंग कर आपत्ति जताई है | राजेश गोंड ने मूल आदिवासी जनजाति कल्याण संस्था के अध्यक्ष बी बी चौधरी को नेपाल वासी बताते हुए मुकदमा हारने के बाद फर्स्ट इनफार्मेशन्स को स्टेटमेंट देने पर सवाल किया | राजेश गोंड ने कहा कि श्री चौधरी यह सब जो कर रहे है केवल पैसे के लिए करते है | राजेश गोंड से जब सम्पादक ने चौधरी पर पर लगाये जा रहे आरोप के बाबद साक्ष्य की मांग की तो माननीय उच्च न्यायालय में ख़ारिज हुए मुकदमे के अदेस की उनके द्वारा वह कापी दी गई जिसको माननीय अदालत ने कंटेम्प की केस नही पाए जाने पर ख़ारिज की है |
सम्पादक ने खबर पर जताई तटस्थता, मांगे साक्ष्य
सम्पादक के द्वारा इस बात का खुलासा किया गया कि ”फर्स्ट इनफार्मेशन्स” द्वारा न तो पक्ष की बात की जाती है न बिपक्ष की, इसके द्वारा केवल समाज में घट रही विधिपूर्ण और अविधिपूर्ण घटनाओ को जनसामान्य तक जनहित में पहुचाने का काम किया जाता है |
श्री चौधरी को नेपाल वासी होने का सपा नेता ने नही दिया साक्ष्य
प्रदेश अध्यक्ष राजेश गोंड ने इस बात को स्वीकार करते हुए अपना पक्ष सम्पादक तक पहुचाया गया | उधर आदिवासी संस्था के श्री चौधरी ने राजेश गोंड से उस प्रमाण पत्र को सार्वजनिक करने की मांग की है जो श्री चौधरी को नेपाल का निवासी साबित करता हो |श्री चौधरी ने साफ शब्दों में कहा कि राजेश पिछड़ी जाति में सूचीबद्ध गोंड विरादरी है, यदि ये भी खुद को गोंड मानते है या फिर इसका उनके पास सबुत है कि वह गोंड आदिवासी है तो उसको भी उन्हें समाजहित में सार्वजानिक करना चाहिये | श्री चौधरी ने आगे कहा कि राजस्व रिकॉर्ड में यह लिखा पाया जाना यह साबित करता है वह यही के निवासी और गोड़ विरादरी के है न कि यह साबित करता है वह गोंड विरादरी के बिस्थापित गोंड है |
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