लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा में बजट प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान शुक्रवार को नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार के बजट को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि सरकार बजट तो लाती है लेकिन खर्च नहीं कर पाती है। सरकार पर कर्ज होने की बात भी कही। नेता प्रतिपक्ष के भाषण के दौरान कई बार सदन में ठहाके लगे। नेता सदन व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी नेता प्रतिपक्ष के भाषण के दौरान हसंते रहे।
माता प्रसाद पांडेय ने यूपी की शिक्षा व्यवस्था को ठीक करने की बात कही। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में पढ़ाई नहीं हो पा रही है। शिक्षकों की कमी है। जिन विद्यालयों में शिक्षक हैं ,वे खंड शिक्षा अधिकारी से मिलकर विद्यालय नहीं आ रहे हैं। यदि बच्चों की नींव मजबूत होगी तो आगे उनका रास्ता आसान होगा। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के विद्यालयों में फीस निर्धारण में सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। सरकार को चाहिए कि इसके लिए कमेटी गठित कर मॉनिटरिंग की जाए।
पांडेय ने कहा कि उच्च शिक्षा में भी सुधार की जरूरत है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में शोधपरक शिक्षा होनी चाहिए। यहां केवल इतिहास, अर्थशास्त्र व अन्य विषयों में ही पीएचडी कर रहे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में पीएचसी करने वाले विद्यार्थियों की संख्या न के बराबर है। गलगोटिया विश्वविद्यालय के तथाकथित शोध का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे विश्विद्यालयों पर नकेल कसने की जरूरत है। सरकार मान्यता देने से पहले गंभीरता दिखाए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अच्छे चिकित्सकों की तैनाती की जाए। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को विकसित किया जाए। पीएचसी, सीएचसी पर चिकित्सकों के साथ जांच की व्यवस्था की कमी है। सिटी स्कैन, एमआरआई जैसी जांच उपलब्ध होनी ही चाहिए जो कि नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने इसी प्रकार समीक्षा करते हुए बजट पर सवाल खड़ा किए और सरकार को कई सुझाव भी दिए। उन्होंने कहा कि मैं केवल आलोचना नहीं करता हूँ। मैं तो सरकार को सुझाव भी बड़े दे रहा हूँ। यह सरकार सुझाव मानेगी तो ठीक है, नहीं तो वह इस ओर (विपक्ष में) बैठेगी।
