नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में बुधवार को पश्चिम बंगाल में आई-पैक के दफ्तर में रेड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान संक्षिप्त गर्मागर्म बहस देखने को मिली। एक तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि ईडी को हथियार दिए जा रहे हैं तो ईडी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ईडो को भयभीत करने की कोशिश की जा रही है। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि ईडी को हथियार दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईडी को ये बताना होगा कि उन्हें इतने अधिकार कैसे मिले। इस पर ईडी की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू भड़क गए और उन्होंने कहा कि ईडी को डराया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे इस बात पर दलील रखेंगे कि ईडी को अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने का अधिकार है कि नहीं। इस पर पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि हम अपनी दलील में याचिका के सुनवाई योग्य होने का सवाल उठा चुके हैं। ये बात कोर्ट नोट कर चुकी है। सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और सिद्धार्थ लूथरा ने निशांत नाम व्यक्ति की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी करने का विरोध किया। गुरुस्वामी ने कहा कि निशांत की कई याचिकाएं खारिज की जा चुकी हैं। उसके बाद उच्चतम न्यायालय ने सुनवाई टालते हुए मामले की अगली सुनवाई 18 मार्च को करने का आदेश दिया।
इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उच्चतम न्यायालय से ईडी की याचिका खारिज करने की मांग की है। राज्य सरकार की ओर से दाखिल हलफनामा में कहा गया है कि जब इसी तरह की याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय में लंबित है तो समानांतर कार्रवाई नहीं हो सकती है। हलफनामा में कहा गया है कि ईडी को उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दाखिल करने का अधिकार नहीं है। आई-पैक के दफ्तर पर सर्च से पहले कोई नोटिस जारी नहीं किया गया था। राज्य सरकार ने ईडी पर प्रिविलेज्ड कम्युनिकेशन के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
ईडी की याचिका पर 15 जनवरी को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के दखल के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। कोर्ट ने ईडी अधिकारियों पर पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर पर भी रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि लोकतंत्र में प्रत्येक अंग अपना काम स्वतंत्र रूप से काम कर सके इसके लिए इस मामले की जांच जरूरी है। कोर्ट ने कहा था कि किसी भी केंद्रीय एजेंसी को किसी राजनीतिक दल के चुनावी कार्य में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है, लेकिन अगर कोई केंद्रीय जांच एजेंसी अपना काम विधि सम्मत कर रही है तो राजनीतिक काम की आड़ में केंद्रीय जांच एजेंसियों को जांच करने से नहीं रोका जा सकता है।
ईडी के पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने उच्चतम न्यायालय में केवियट दाखिल कर दिया था। आठ जनवरी को ईडी ने तृणमूल कांग्रेस के प्रचार का काम देखने वाली कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के आवास पर छापा मारा था। ईडी ने ये छापा कथित कोयला घोटाला मामले की जांच के लिए मारा था। इस मामले में ईडी ने उच्चतम न्यायालय में नई अर्जी दाखिल कर पश्चिम बंगाल पुलिस के डीजीपी राजीव कुमार को हटाए जाने की मांग की है। ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें डीजीपी राजीव कुमार भी शामिल हैं, को निलंबित किए जाने की मांग की है। ईडी का आरोप है कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर चोरी में मदद की। अर्जी में कहा गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे।
