
जयपुर, । राजस्थान हाईकोर्ट ने मृत सिपाही की स्पेशल पेंशन को लेकर दिए अदालती आदेश की सात साल में भी पूर्णतः पालना नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने 13 नवम्बर को प्रमुख गृह सचिव को पेश होकर अपना जवाब देने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी सुनवाई पर पालना रिपोर्ट पेश कर दी जाती है तो प्रमुख गृह सचिव को हाजिर होने की आवश्यकता नहीं है। जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने यह आदेश सरिता की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि यह बड़े आश्चर्य की बात है कि अदालती आदेश के खिलाफ पेश अपील को खंडपीठ ने निस्तारित कर दिया और मामले में रिव्यू पिटीशन भी तय हो चुकी, लेकिन विभाग की ओर से आदेश की पालना नहीं की गई।
याचिका में अधिवक्ता सौगत राय ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पति पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात थे। एक मुकदमे में अनुसंधान के लिए जाते समय रास्ते में हुई दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से पुलिस प्रशासन के समक्ष नियमानुसार दी जाने वाली स्पेशल पेंशन के लिए आवेदन किया, लेकिन याचिकाकर्ता को स्पेशल पेंशन जारी नहीं की गई। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से सात 2015 में याचिका दायर की गई। जिसे एकलपीठ ने साल 2018 में स्वीकार करते हुए एक माह में परिलाभ जारी करने के आदेश दिए। ऐसा नहीं करने पर अदालत ने दी जाने वाली राशि पर नौ फीसदी ब्याज अदा करने को कहा। याचिका में कहा गया कि इस आदेश की विभाग की ओर से खंडपीठ में अपील दायर की गई। अपील के लंबित रहने के दौरान विभाग ने याचिकाकर्ता को परिलाभ दे दिए, लेकिन ब्याज अदा नहीं किया। वहीं खंडपीठ ने अपील का निस्तारण करते हुए विभाग को एकलपीठ के समक्ष रिव्यू याचिका लगाने को कहा। इस रिव्यू याचिका को भी एकलपीठ ने तय कर दिया, लेकिन विभाग ने ब्याज राशि जारी नहीं की। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने आगामी सुनवाई तक पालना रिपोर्ट पेश नहीं करने पर प्रमुख गृह सचिव को हाजिर होने को कहा है।
