मऊ। जिले मे पिछड़ी जाति के कहार (गोड़) विरादरी के अधिकांश लोगो के द्वारा संबंधित राजस्व कर्मचारियों को अपनी साजिस मे लेकर कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से तथ्यों को छुपाकर बनवाये गए फर्जी अनुसूचित जन जाति के जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर हड़पी गईं सरकारी नौकरी की जाँच शुरू हो गईं हैं। बीते 15 नवम्बर 2025 को जिला बिकास अधिकारी मऊ ने जाँच को पत्र लिखा हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिले मे ग्राम विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर आधा दर्जन से अधिक लोगो मे से तीन लोगो के द्वारा संबंधित राजस्व कर्मचारियों को अपनी साजिस मे लेकर कूट रचित दस्तावेजो के सहारे तथ्यों का छुपाव कर राजस्व कर्मचारियों से बनवाये गए फर्जी अनुसूचित जन जाति के जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने करने की माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता ब्रह्मा नन्द पाण्डेय के द्वारा जिलाधिकारी मऊ, जिला विकास अधिकारी मऊ, और जिला पंचायत राज अधिकारी मऊ से मेल के माध्यम से न्याय और समाजहित मे शिकायत की गईं हैं।

दिनांक 15/11/2025 को जिला बिकास अधिकारी मऊ ने अपने पत्रांक 1039 के माध्यम से ग्राम विकास अधिकारी संजय प्रसाद की जाति को लेकर तहसीलदार मऊ से जाँच आख्या तलब की गईं तों शेष दो ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ जाँच के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी को अपने पत्रांक 1040 के माध्यम से पात्र लिखा गया हैं.। ग्रामविकास अधिकारी संजय प्रसाद विकास खंड रतनपुरा के इतइली ग्राम सभा के निवासी हैं तों ग्राम पंचायत अधिकारी राधेश्याम घोसी ब्लॉक तों सर्वद्र विकास खंड रतनपुरा इलाके के निवासी हैं। जिला विकास अधिकारी ने अपनी कार्रवाई से जिलाधिकारी मऊ को भी सूचित किया हैं।
जिले मे नहीं पाई जाती हैं अनुसूचित जन जाति
माननीय उच्च न्यायलय इलाहाबाद दाखिल मे मिथिलेश बनाम उत्तर प्रदेश सरकार 56695/2015 मे तत्कालीन जिलाधिकारी मऊ ने 45 कि संख्या मे राजस्व कर्मचारियों को साजिस मे लेकर बनवाये गए फर्जी अनुसूचित जन जाति के प्रमाण पत्रों को निरस्त करतें हुए माननीय अदालत मे, जिले मे अनुसूचित जन जाति के लोगो को नहीं पाए जाने के तथ्य का लिखित रूप मे खुलासा किया हैं।
खुद को गोंड बताने वालो की जाँच कर कार्यवाही से बच रहा प्रशाशन
जिले मे पिछड़ी जाति मे आने वाली गोड़ विरादरी के द्वारा खुद को गोंड बताकर विभागों मे की जा रही शिकायतों की विभागीय अधिकारी, हल्के मे ले रहे हैं. जिले मे गोंड विरादरी नहीं पाई जाती हैं, जानते हुए इनकी शिकायतों की जाँच की जा रही हैं जबकि सबसे पहले शिकायतकर्ता की जाति की जाँच कर विधिक कार्यवाही मे तथ्य हीन और झूठी शिकायत करने मे विधिक कार्यवाही कि जानी चाहिए।
शिकायतकर्ता पर फर्जी मुकदमे दर्ज कराने की और जान से मारने की डी जा रही धमकी
फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सस्था बना, फर्जी अनुसूचित जन जाति के जाति प्रमाण पात्र पर सरकारी नौकरी हथियाये लोगो का कई फर्जी सस्था के फर्जी लोगो के द्वारा खुलेआम खुद को गोंड विरादरी का बताकर ( यह जानते हुए कि गोंड विरादरी जिले मे नहीं पाई जाती हैं ) समूह ने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नोकरी हथियाये लोगो के शिकायतकर्ताओ के खिलाफ तथ्य हीन आरोप लगा कर शिकायतकर्ता पर नाजायज दबाव बनाने का काम किया जा रहा हैं.। शिकायतकर्ता इतने बड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ मुँह बंद कर ले, कही आई ज़ी आर एस तों कही सीधे तौर पर पुलिस मे बेबुनियाद आरोप में मुकदमे दर्ज कराने और जान से मरने की धमकी डी जा रही हैं।
