नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस साल के पहले 15 दिनों में आठ सौ से ज्यादा लोगों के गायब होने पर कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय की अध्यक्षता वाली बेंच ने चार हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि राईट टू बी फाउंड (मिलने का अधिकार) संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार का अहम हिस्सा है। याचिका में कहा गया है कि गुमशुदा व्यक्तियों को ढूंढने के लिए बाध्यकारी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया जा रहा है। गुमशुदा व्यक्तियों को खोजने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर तो जारी किए गए हैं लेकिन वे कड़ाई से लागू नहीं किए जाते हैं। यही वजह है कि दिल्ली में बड़े पैमाने पर लोग गायब हो रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
एक खबर के मुताबिक एक जनवरी से 15 जनवरी के बीच 807 लोग दिल्ली से गायब हो गए हैं। इस खबर पर दिल्ली में व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। छह फरवरी को दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में एक्स पर एक पोस्ट किया और कहा कि गायब होने में बढ़ोतरी की खबरों को पैसे लेकर प्रमोट किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने लोगों में भय पैदा करने वालों पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी दी। हालांकि इस मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में विस्तृत जवाब तलब किया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा कि अगर ये सही है तो ये काफी गंभीर मामला है।
