मऊ। जिला जातीय सत्यता समिति के समक्ष जाति बदलने को लेकर की गईं शिकायत के मामले में जिला जातीय सत्यता समिति द्वारा आरोपियों से मिलकर शिकायतों के निस्तारण में जानबूझकर देरी किये जाने की खबर हैं। समिति के इस कार्यशैली से राजस्व कर्मचारियों को अपने अपने आपराधिक साजिस में लेकर कूट रचित दस्तावेजो के सहारे तथ्यों का गोपन कर बनवाये गए फर्जी जाति प्रमाण पत्रों को सरकारी अभिलेखों मेंलगाकर और लगवा कर हथियायी गईं सरकारी नौकरी से लखो रूपये माहवारी के रूप में हड़पे जाने को बल मिल रहा हैं।

जिला जातीय सत्यता समिति के इस कारनामें का खुलासा जिला बिद्यालय निरीक्षक आजमगढ़ उपेंद्र कुमार के खिलाफ मूल अधिवसी जनजाति कल्याण सस्था के अध्यक्ष द्वारा जुलाई 2025 में की गईं शिकायत को किये पांचवा महीना बीतने को हैं, न तों जिला जातीय सत्यता समिति ने दुबारा जाँच अधिकारी को रिमाइंडर दिया और न ही बतौर जाँच अधिकारी तहसीलदार मधुबन ने जाँच रिपोर्ट दी। उपेनदर कुमर जनपद के तहसिल मधुबन के ग्राम हैबतपुर का निवासी हैं| उपेनदर के खिलाफ़ जिला जातिय सत्यता समिति की यह कार्यशैली एक वानगी भर है | जिससे अनेको को लाभ मिल रहा हैं और उनके हौशले बुलंद हैं।
डीडीओ ने जानबूझकर डीसीएससी को नहीँ लिखा पत्र
ग्राम बिकास अधिकारी के रूप में संजय प्रसाद और राधेश्याम, सेरवेन्द्र के द्वारा पिछड़ी जाति का होते हुए अनुसूचित जन जाति का राजस्व कर्मचारियों को अपनी साजिस में लेकर कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से तथ्यगोपॅंन कर बनवाये गए फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी करने को लेकर, एक शिकायतकर्ता द्वारा मऊ के जिलाधिकारी, जिला विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी को उनके मेल आईडी पर शिकायत भेजी गईं थी। इस शिकायत का जिलाधिकारी मऊ ने संज्ञान नहीँ लिया तों जिला बिकास अधिकारी मऊ ने मामले का संज्ञान लेकर तहसीलदार सदर से जाँच रिपोर्ट तरलब करतें हुए ग्राम पंचायत अधिकारियो की जाति जाँच के लिए पत्र लिखा हैं. लेकिन आज तक इस मामले में जिलाधिकारी द्वारा मामले का संज्ञान नहीँ लिया गया।।
DCSC को 30 दिनों में शिकायतों के निपटारे का शासनादेश हैं
जातियों में बदलाव को लेकर पड़ी शिकायतों को जिला जातिय सत्यता समिति को 30 दिनों में निपटारे का आदेश हैं. बावजूद इसके कमेटी के द्वारा शासनादेश का पालन करने में जानबूझकर देरी की जाति हैं।
जाति बदल नौकरी करने वालों की चांदी
जातियों को लेकर उपजे शिकायतों के निपटारे को लेकर शासन से मिली समय सीमा को लेकर जिला जाति सत्यता कमेटी द्वारा गंभीरता से नहीँ लिए जाने के कारण जिले में फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे पिछडी जाती के अधिकांश लोगबके हौशले बुलंद हैं और वे शिकायतकर्ताओ के ऊपर नाजायज दबाव बनाने में पुलिस में तथ्यहींन आरोप लगा कर शिकायतों को वापस लेने का नाजायज दबाव बना रहे हैं।
फर्जी जाति प्रमाण पत्रों पर नौकरी करने वालों में 2 और
ग्राम पंचायत अधिकारी श्रावण कुमार भी पिछड़ी जाति में आने वाली कहार जाति का होते हुए कूट रचित दस्तावेजो के माध्यम से तथ्य गोपन कर राजस्व कर्मचारी को अपने अपराधिक साजिस में ले, उनसे बनवाये गए फर्जी अनुसूचित जन जाति के प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहा हैं। तों घोसी में मनोज कुमार भी जनपद बलिया के सुखपुरा से फर्जी जाति प्रमाण पात्र बनवा कर नौकरी कर रहा हैं।
मऊ में नहीं पाई जाने वाली जाति, मांग रही अनुसूचित जन जाति का प्रमाण पत्र – First Informations
